इंदौर के तेजाजी नगर में तेजा दशमी पर लगा मेला ।


इंदौर के तेजाजी नगर में तेजा दशमी पर लगा मेला

श्रद्धालुओं ने मंदिरों पर निशान चढ़ाए, ग्रामीण क्षेत्रों से भी पहुंचे लोग

इंदौर में तेजाजी नगर स्थित तेजाजी महाराज मंदिर  में हजारों की तादात में  पहुंचे दर्शनार्थी। प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी तेजाजी नगर में तेजाजी महाराज जयंती पर मेले का आयोजन किया गया । 

तेजाजी नगर कैलोद करताल स्थित तेजाजी महाराज मंदिर में तेजा दशमीं पर्व नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में मेला लगा। तेजाजी नगर के  चौराहे के समीप तेजाजी मंदिर पर  श्री तेजाजी स्थान पर विधि-पूर्वक पूजा पाठ के साथ मेला लगाया गया है। श्रद्धालुओं ने मंदिरों पर निशान चढ़ाए हैं।

तेजाजी नगर थाना की व्यवस्था को लेकर थाना प्रभारी देवेंद्र मरकाम से चर्चा 

इंदौर के तेजाजी नगर में स्थित  तेजाजी महाराज मंदिर पर नवमीं रात को जागरण किया गया। मंदिर में आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है। परंपरागत रूप से मेला (जत्रा) का परंपरागत आयोजन किया जा रहा है।

नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र से भी लोग अपनी मन्नतें पूरी होने पर रंग बिरंगी छतरियां निशान लेकर मंदिर तक अखाड़ों के साथ गाजे बाजे के साथ आ रहे हैं।

तेजाजी नगर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों सहित अन्य क्षेत्रों के मन्नत धारी अखाड़ों के साथ निशान चढ़ाने भक्त स्थानीय मंदिरों पर पहुंच रहे हैं।

वीर तेजाजी को लोक देवता माना जाता है और उन्हें भगवान शिव का ग्यारहवां अवतार माना जाता है. उनके शहीद दिवस को तेजा दशमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन लोग उनके मंदिरों में जाकर पूजा करते हैं. 

वीर तेजाजी से जुड़ी कुछ और खास बातें: 

वीर तेजाजी का जन्म राजस्थान के नागौर ज़िले के खरनाल गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम ताहर देव और मां का नाम राम कुंवरी था. 

वीर तेजाजी के माता-पिता भगवान शिव के उपासक थे. 

वीर तेजाजी को सांप का भगवान, काला बाला का भगवान, और धोल्या वीर के नाम से भी जाना जाता है. 

वीर तेजाजी जिस घोड़ी पर सवार रहते थे उसका नाम लीलण था. 

वीर तेजाजी के साथ में भाला, तलवार, और धनुष-बाण रहते थे. 

वीर तेजाजी की पत्नी का नाम पेमल था. 

सुरसुरा गांव में लाछा गुर्जरी की गायों को बचाने के चक्कर में वीर तेजाजी घायल हो गए और सांप के काटने से उनकी मौत हो गई. 

वीर तेजाजी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी पेमल सती हो गई. 

मत-मतांतर से यह पर्व भारत में मनाया जाता है। इसके साथ ही   बाबा की सवारी (वारा) जिसे आती है, उसके द्वारा रोगी, दुःखी, पीड़ितों का धागा खोला जाता है एवं महिलाओं की गोद भरी जाती है। सायंकाल बाबा की प्रसादी (चूरमा) एवं विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है।

ऐसे सत्यवादी और शूरवीर तेजाजी महाराज के पर्व पर उनके स्थानों पर लोग मन्नत पूरी होने पर पवित्र निशान चढ़ाते हैं तथा पूजन-अर्चन के साथ कई स्थानों पर मेले के आयोजन भी होते है। लोकदेवता तेजाजी के निर्वाण दिवस भाद्रपद शुक्ल दशमी को प्रतिवर्ष तेजादशमी के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान शोभायात्रा के रूप में वीर तेजाजी की सवारी निकाली जाती है। 

✍️✍️✍️🙏पोस्ट बाय 

विश्वामित्र अग्निहोत्री 




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