- इंदौर में वक्फ बोर्ड के खिलाफ बड़ा फैसला,कर्बला मैदान निगम का हुआ।
- कर्बला की जमीन का मालिक नगर निगम:कोर्ट ने सुनाया फैसला, वक्फ बोर्ड को नहीं माना मालिक
- इंदौर नगर निगम की बड़ी जीत: कर्बला मैदान पर मिला मालिकाना अधिकार, वक्त बोर्ड ने बताया था अपना
इंदौर नगर निगम के पक्ष में एक बड़ा फैसला आया है। लालबाग के पास करबला मैदान की जमीन का मालिकी हक नगर निगम का माना गया है। कोर्ट ने करबला मैदान की 6.70 एकड़ जमीन का वक्फ बोर्ड की नहीं मानी है।कोर्ट ने कर्बला मैदान की 6.70 एकड़ जमीन का मालिक वक्फ बोर्ड को नहीं मानते हुए इंदौर नगर निगम को माना है । शहर के मध्य क्षेत्र में लालबाग के समीप स्थित कर्बला मैदान की जमीन के मालिकी हक को लेकर इंदौर नगर निगम के पक्ष में बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने कर्बला मैदान की 6.70 एकड़ जमीन का मालिक वक्फ बोर्ड के बजाय इंदौर नगर निगम को माना है। निगम की ओर से दायर दीवानी अपील को स्वीकार करते हुए 15वें जिला न्यायाधीश नरसिंह बघेल की कोर्ट ने निगम के पक्ष में डिक्री पारित कर दी है ।
निगम की तरफ से दीवानी अपील दायर की गई थी। जिसे स्वीकारते हुए 15वें जिला न्यायाधीश नृसिंह बघेल की कोर्ट ने निगम के पक्ष में डिक्री पारित कर दी है। निगम ने अपील में पंच मुसलमान करबला मैदान कमेटी और वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था।
इंदौर निगम की ओर से दायर दीवानी अपील को स्वीकार करते हुए 15वे जिला न्यायाधीश नरसिंह बघेल की कोर्ट ने निगम के पक्ष में डिक्री पारित कर दी है। नगर निगम की ओर से दायर इस अपील में पंच मुसलमान कर्बला मैदान कमेटी और वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था
- कोर्ट ने लिया अहम फैसला ,
- कोर्ट ने ये माना
वादग्रस्त भूमि खसरा नंबर 1041 रकबा 6.70 एकड़, जिसका म्यूनिसिपल खसरा नंबर 17017 का स्वामित्व प्रमाणित किया है। निगम स्वामित्व की घोषणा की डिक्री प्राप्त करने के हकदार हैं।
न्यायालय द्वारा पारित निर्णय एवं डिक्री दिनांक 13 मई 2019 को पलटते हुए निगम की अपील स्वीकार की जाती है और उसके पक्ष में डिक्री पारित कर यह घोषित किया जाता है कि वादग्रस्त भूमि का स्वामी इंदौर नगर निगम है। निगम यह प्रमाणित करने में असफल रहा हैं कि प्रतिवादीगण वाद ग्रस्त भूमि पर अवैध रूप से दीवार बनाकर अतिक्रमण करने का प्रयास कर रहे हैं।
ऐसी स्थिति में वादी/अपीलार्थी के पक्ष स्वत्व घोषणा की डिक्री पारित किया जाना उचित होगा और प्रतिवादी गण के विरुद्ध स्थायी निषेधाज्ञा जारी किये जाने योग्य मामला नहीं है। इसी तरह प्रतिवादीगण यह प्रमाणित करने में असफल रहे हैं कि वाद ग्रस्त संपत्ति वक्फ संपत्ति है। प्रतिवादी गण यह प्रमाणित करने में सफल रहे हैं कि मोहर्रम के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग विगत 150 वर्षों से वाद ग्रस्त संपत्ति के भाग पर ताजिए ठंडे करने का धार्मिक कार्य करते चले आ रहे हैं।
पूर्व में निगम ने वाद दायर किया था जिसे कोर्ट ने 2019 में निरस्त कर दिया था। इसके विरूद्ध अपील की गई थी। निगम का कहना था कि वो जमीन का मालिक है। जमीन से लगी सरस्वती नदी के पास के मात्र 0.02 एकड़ भूमि ताजिए ठंडे करने के उपयोग में आती है। जमीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश की जा रही है।
वहीं पंच मुसलमान करबला मैदान कमेटी और वक्फ बोर्ड का कहना था कि 150 साल पहले इंदौर के श्रीमंत राजा ने वाद ग्रस्त स्थान को मुस्लिम समाज को मोहर्रम त्योहार और ताजिए ठंडे करने के लिए दिया था। 29 जनवरी 1984 इसका वक्फ संपत्ति के रूप में रजिस्ट्रेशन हुआ था । उपरोक्त विवेचन के आधार पर नगर निगम यह प्रमाणित करने के सफल रहा हैं कि वाद ग्रस्त भूमि वादी नगर पालिक निगम,इंदौर में वेष्टित भूमि होने से वाद ग्रस्त भूमि का स्वामी एवं आधिपत्य धारी है । निगम यह प्रमाणित करने में असफल रहा हैं कि प्रतिवादी गण वाद ग्रस्त भूमि पर अवैध रूप से दीवार बनाकर अतिक्रमण करने का प्रयास कर रहे हैं । ऐसी स्थिति में वादी/अपीलार्थी के पक्ष स्वत्व घोषणा की डिकी पारित किया जाना उचित होगा और प्रतिवादी गण के विरुद्ध स्थाई निषेधाज्ञा जारी किये जाने योग्य मामला नहीं है । इसी तरह प्रतिवादीगण यह प्रमाणित करने में असफल रहे हैं कि वाद ग्रस्त संपत्ति वक्फ संपत्ति है ।प्रतिवादी गण यह प्रमाणित करने में सफल रहे हैं कि मोहर्रम के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग विगत 150 वर्षों से वाद ग्रस्त संपत्ति के भाग पर ताजिए ठंडे करने का धार्मिक कार्य करते चले आ रहे हैं ।
