मंदसौर जिला ग्राम कयामपुर स्थित केंद्रीय सहकारी बैंक ब्रांच जिसके अंतर्गत चार सोसाइटी आती है जिसमे ग्रामीण किसानों का समस्याओं को निराकरण शाखा प्रबंधक सीएस पाटीदार द्वारा स्वयं की देखरेख में किया जाता है । उन्होंने बताया की सहकारिता विभाग विभिन्न प्रकार की सहकारी संस्थाओं को आवश्यक मार्गदर्शन, संरक्षण एवं आर्थिक तथा तकनीकी सुविधा जैसे अंशपूजी, ऋण, ऋण गारन्टी तथा अनुदान आदि सुलभ कराता है। इस पृष्ठभूमि के साथ वर्तमान अर्थ व्यवस्था में सहकारिता क्षेत्र अपनी भूमिका का निर्वहन आर्थिक एवं सामाजिक उन्नयन में सक्षमता के साथ कर रही हैं।
शाखा प्रबंधक पाटीदार ने जानकारी दी की राज्य सरकारें नियमित रूप से सहकारी समितियों और उनकी गतिविधियों की निगरानी करती हैं। वे यह सुनिश्चित करने के लिए ऐसा करते हैं कि इसके सदस्यों के वित्तीय हितों की रक्षा की जाए। ब्रांच को हर समय उचित खाते बनाए रखने होते हैं। स्वतंत्र लेखा परीक्षक नियमित रूप से उनके खातों की जाँच करते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई वित्तीय गड़बड़ी नहीं हो रही है।
सहकारी समितियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में अपने सदस्यों – व्यक्तियों या छोटे व्यवसायों – को वित्तीय सहायता प्रदान कर सकती हैं। ऋण सहकारी समितियाँ कम ब्याज दरों और लचीली पुनर्भुगतान शर्तों पर ऋण वितरित करने में शामिल हैं। ग्रामीण विकास में सहकारी समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि वे अपने सदस्यों को निजी साहूकारों से बचाती हैं जो बहुत अधिक ब्याज दरों पर ऋण देते हैं। अपने सदस्यों के सीमित वित्तीय संसाधनों के कारण ऋण सहकारी समितियाँ शायद ही कभी बड़ी मात्रा में पूंजी जुटा पाती हैं। हालाँकि, वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि और गैर-कृषि दोनों व्यवसायों की व्यवहार्यता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सी एस पाटीदार ने यह भी बताया की समितियां जमीनी स्तर से काम करती है और ऋण वसूली में समस्यते आती है । किसान द्वारा ऋण अदा करने में दिक्कत आती है किसान ऋण माफी की कयास लगाए रहता है । जिससे समस्या उत्पन्न होती है ।
ग्रामीण विकास में सहकारी समितियों की भूमिका हमारी सोच से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है। वे व्यक्तियों और व्यवसायों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने में सक्षम बनाती हैं, और वे छोटे और मध्यम उद्यमों को चलाने में भी मदद करती हैं जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
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