सिंहस्थ की छटा होती है निराली
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 12 वर्षों में आयोजित होने वाले सिंहस्थ की छटा निराली होती है। समारोह में उपस्थित देवतुल्य धर्माचार्य के दर्शन लाभ से परमात्मा के दर्शन की अनुभूति हो रही हैं। स्वामी श्री रामानुज जी महाराज ने अपने अलौकिक दर्शन से सनातन धर्म के संरक्षण के साथ मानव से मानव को जोड़कर जनसेवा का मार्ग भी दिखाया है। समाज में आने वाली विभिन्न चुनौतियों के बावजूद भी स्वामी जी द्वारा भक्ति मार्ग का निरंतर प्रसार किया गया, जिसकी अविरल धारा आज भी प्रवाहित हो रही है।
न्यायाधीश श्री माहेश्वरी ने कहा कि समानता हमारे सनातन संस्कृति में वेद पुराणों के साथ हमारे संविधान में भी उल्लेखित है। भारत के संविधान में समानता का अधिकार मानव को प्राप्त पहला अधिकार हैं। ईश्वर का समभाव भी सभी के लिए समान है। अगर कोई व्यक्ति महत्वपूर्ण पद पर आसीन होता है तो वह बिना देवीय कृपा के संभव नहीं हैं। ईश्वर ने ही उसे जनहित के लिए चुना है। इसीलिए उसे सदैव मानव सेवा के कार्य में संलग्न रहना चाहिए।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीठाधीश्वर स्वामी श्री रंगनाथाचार्य जी महाराज सहित अन्य धर्माचार्यों को पुष्पमाला और अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने जनहित के लिये एक एम्बुलेंस को हरि झंडी दिखाकर रवाना किया।
